भारत में प्रकाशन उद्योग काफी फैला हुआ है। सदियों पुराने इस फील्ड में प्रकाशक अब आधुनिक तौर-तरीके अपना रहे हैं, फिर बात चाहे प्रिंटिंग की हो, मार्केटिंग की या डिलिवरी की। जाहिर है, प्रकाशन जगत करियर की भी अच्छी संभावनाएं सहेजे हुए है। आज की डिजिटल दुनिया में भी किताबों ने अपनी जगह बरकरार रखी है, बल्कि यह कहना चाहिए कि प्रकाशन उद्योग आज एक रोचक दौर से गुजर रहा है। इस फील्ड में बढ़ती प्रतियोगिता से न सिर्फ किताबों का बाजार फैला है, बल्कि प्रॉडक्ट की क्वॉलिटी भी सुधरी है। साथ ही पाठकों तक किताबों की काफी ज्यादा वैराइटी भी पहुंचने लगी है। रिटेल बाजार के विस्तार, बढ़ते पाठक और डिजिटल मीडिया के सहयोग ने इस इंडस्ट्री के लिए संभावनाओं के नए दरवाजे खोले हैं।
कार्यक्षेत्र : प्रकाशन जगत में कार्यक्षेत्र कंटेंट की एडिटिंग या कुछ डिजाइन पैटर्न देने से कहीं आगे जा चुका है। एक संपादक के रूप में कार्य करने के लिए कंटेंट की गहरी समझ और चीजों को विस्तार से समझने की ललक होनी चाहिए। संबंधित भाषा और विषय पर अच्छी पकड़ भी होनी चाहिए। विषय के बारे में सतही जानकारी रखने से संपादक का काम नहीं चलता। विस्तृत जानकारी जरूरी है। आज बुक्स का ले-आउट किसी बंधे-बधाए ढरेर् पर नहीं होता, इसलिए इस फील्ड में डिजाइनर्स की डिमांड भी काफी बढ़ गई है। इलस्ट्रेटर, कार्टोग्राफर, डीटीपी ऑपरेटर आदि के रूप में अच्छे अवसर मिलते हैं। प्रकाशन उद्योग फ्रीलांसर के रूप में भी काम करने के मौके उपलब्ध कराता है, जैसे- अनुवादक और प्रूफ रीडर के रूप में।
योग्यता : यह कहना गलत होगा कि इस फील्ड में काम करने के लिए मीडिया या पब्लिशिंग इंडस्ट्री का ही अनुभव होना चाहिए। शैक्षिक योग्यता की बात करें, तो कम से कम ग्रैजुएट होने पर रोजगार के ज्यादा अवसर उपलब्ध होंगे। आप प्रकाशन के क्षेत्र में जिस भाषा में करियर बनाना चाहते हैं, उस पर काफी अच्छी पकड़ होनी जरूरी है। अन्य लोगों से आगे कुछ अलग तरीके से सोचने की क्षमता आपको इस क्षेत्र में सफल बनाएगी। डिजाइन के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रफेशनल डिग्री हासिल करना लाभदायक रहेगा। शॉर्ट टर्म कोर्स करने पर आप डीटीपी प्रफेशनल के रूप में करियर बना सकते हैं। किताबों में नक्शे आदि के प्रयोग के लिए कार्टोग्राफर की जरूरत पड़ती है। इस रूप में काम करने के लिए जियोग्राफी या जियोग्राफिक इंफरमेशन सिस्टम बैकग्राउंड होना चाहिए। सबसे अहम है, किताबों से आपकी दोस्ती होनी चाहिए। प्रकाशन जगत में क्रिएटिविटी की भी बहुत जरूरत होती है। किताबें चाहे साहित्य से जुड़ी हों या कमर्शल, क्रिएटिविटी से उनकी गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है।
सावधानियां : प्रकाशन के क्षेत्र में काम करते समय विभिन्न मुद्दों पर सावधान रहना चाहिए, जैसे- लाइसेंसिंग, कॉपी राइट, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स आदि। इन मुद्दों को क्लास रूम में यदा-कदा ही पढ़ाया जाता है और इनसे जुड़े प्रफेशनल कोर्स भी शायद ही कहीं उपलब्ध हैं। ऐसे में अतिरिक्त सावधानी की जरूरत है।
आमदनी : इस क्षेत्र में अधिक प्रतियोगिता के चलते सैलरी स्ट्रक्चर काफी बेहतर है। फ्रीलांसर के रूप में भी अच्छी आमदनी पा सकते हैं।
कार्यक्षेत्र : प्रकाशन जगत में कार्यक्षेत्र कंटेंट की एडिटिंग या कुछ डिजाइन पैटर्न देने से कहीं आगे जा चुका है। एक संपादक के रूप में कार्य करने के लिए कंटेंट की गहरी समझ और चीजों को विस्तार से समझने की ललक होनी चाहिए। संबंधित भाषा और विषय पर अच्छी पकड़ भी होनी चाहिए। विषय के बारे में सतही जानकारी रखने से संपादक का काम नहीं चलता। विस्तृत जानकारी जरूरी है। आज बुक्स का ले-आउट किसी बंधे-बधाए ढरेर् पर नहीं होता, इसलिए इस फील्ड में डिजाइनर्स की डिमांड भी काफी बढ़ गई है। इलस्ट्रेटर, कार्टोग्राफर, डीटीपी ऑपरेटर आदि के रूप में अच्छे अवसर मिलते हैं। प्रकाशन उद्योग फ्रीलांसर के रूप में भी काम करने के मौके उपलब्ध कराता है, जैसे- अनुवादक और प्रूफ रीडर के रूप में।
योग्यता : यह कहना गलत होगा कि इस फील्ड में काम करने के लिए मीडिया या पब्लिशिंग इंडस्ट्री का ही अनुभव होना चाहिए। शैक्षिक योग्यता की बात करें, तो कम से कम ग्रैजुएट होने पर रोजगार के ज्यादा अवसर उपलब्ध होंगे। आप प्रकाशन के क्षेत्र में जिस भाषा में करियर बनाना चाहते हैं, उस पर काफी अच्छी पकड़ होनी जरूरी है। अन्य लोगों से आगे कुछ अलग तरीके से सोचने की क्षमता आपको इस क्षेत्र में सफल बनाएगी। डिजाइन के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रफेशनल डिग्री हासिल करना लाभदायक रहेगा। शॉर्ट टर्म कोर्स करने पर आप डीटीपी प्रफेशनल के रूप में करियर बना सकते हैं। किताबों में नक्शे आदि के प्रयोग के लिए कार्टोग्राफर की जरूरत पड़ती है। इस रूप में काम करने के लिए जियोग्राफी या जियोग्राफिक इंफरमेशन सिस्टम बैकग्राउंड होना चाहिए। सबसे अहम है, किताबों से आपकी दोस्ती होनी चाहिए। प्रकाशन जगत में क्रिएटिविटी की भी बहुत जरूरत होती है। किताबें चाहे साहित्य से जुड़ी हों या कमर्शल, क्रिएटिविटी से उनकी गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है।
सावधानियां : प्रकाशन के क्षेत्र में काम करते समय विभिन्न मुद्दों पर सावधान रहना चाहिए, जैसे- लाइसेंसिंग, कॉपी राइट, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स आदि। इन मुद्दों को क्लास रूम में यदा-कदा ही पढ़ाया जाता है और इनसे जुड़े प्रफेशनल कोर्स भी शायद ही कहीं उपलब्ध हैं। ऐसे में अतिरिक्त सावधानी की जरूरत है।
आमदनी : इस क्षेत्र में अधिक प्रतियोगिता के चलते सैलरी स्ट्रक्चर काफी बेहतर है। फ्रीलांसर के रूप में भी अच्छी आमदनी पा सकते हैं।
Courtesy: Ranchi Express, July 2012
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